चम्पावत । सीमांत क्षेत्रों में कमजोर मोबाइल नेटवर्क और धीमी इंटरनेट व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। डिजिटल कनेक्टिविटी को विकास और सुरक्षा से जोड़ते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने दूरसंचार एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि लंबित कार्यों में अब देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
शुक्रवार को आयोजित जिला टेलीकॉम समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सेवाओं और आपातकालीन संचार व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि सीमांत जिले में मजबूत संचार तंत्र समय की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां नेटवर्क की समस्या है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
सीमांत क्षेत्रों की अनदेखी नहीं होगी बर्दाश्त
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि दूरस्थ इलाकों तक संचार सुविधा पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोबाइल और इंटरनेट सेवा अब केवल सुविधा नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं, व्यापार और आपदा प्रबंधन की मुख्य जरूरत बन चुकी है। प्रशासन ने ऐसे क्षेत्रों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जहां अभी भी लोग कमजोर नेटवर्क से जूझ रहे हैं।

चुनाव, आपदा और धार्मिक आयोजनों को लेकर अलर्ट
आगामी निर्वाचन, विशेष अभियानों, धार्मिक आयोजनों और प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए प्रशासन संचार व्यवस्था को मजबूत करने में जुट गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि आपात स्थिति में एक मिनट की संचार बाधा भी राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सभी लंबित परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा किया जाए।
पूर्णागिरि और संवेदनशील क्षेत्रों में रेडियो नेटवर्क की तैयारी सीमांत और संवेदनशील क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं। बूम, मंच और पूर्णगिरि क्षेत्र में वायरलेस रेडियो कम्यूनिकेशन सिस्टम स्थापित किया जाएगा। सेन्ट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था आपदा के समय संचार की रीढ़ साबित होगी।
भारतनेट की रफ्तार पर उठे सवाल, प्रशासन ने दिखाई सख्ती
ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड सुविधा पहुंचाने वाली भारतनेट परियोजना की समीक्षा के दौरान धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए परियोजना में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि गांव स्तर तक इंटरनेट सुविधा पहुंचाए बिना डिजिटल सेवाओं का विस्तार अधूरा रहेगा।

टेलीकॉम कंपनियों को दो टूक—सुधारें नेटवर्क गुणवत्ता
बैठक में निजी कंपनियों को भी जिम्मेदारी का अहसास कराया। एयरटेल और जियो के प्रतिनिधियों को कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने के निर्देश दिए गए। बूम, चूक, धूलीगाड़ और पूर्णगिरि मंदिर क्षेत्र में नेटवर्क सुधार को प्राथमिकता में रखा गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
चार टावर तैयार, जल्द शुरू होंगी सेवाएं
बीएसएनएल ने जानकारी दी कि बिलिल (लोहाघाट), कलचौड़ (लोहाघाट), ब्रह्मदेव (तनकपुर) और धरसों में टावरों से जुड़े सिविल कार्य पूरे हो चुके हैं। तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही इन क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
प्रशासन का दावा—अब हर गांव तक पहुंचेगा डिजिटल भरोसा
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों और टेलीकॉम कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपसी समन्वय और जवाबदेही के साथ काम करते हुए जिले के हर क्षेत्र तक गुणवत्तापूर्ण संचार सेवा सुनिश्चित करें।
बैठक में उपस्थिति
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जी.एस. खाती, बीएसएनएल के डीई आशीष कुमार, जेटीओ विजय बहादुर, एसडीओ सुनील कुमार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, अधिशासी अभियंता यूपीसीएल विजय सवारिया सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जबकि कुछ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।
