देहरादून | 26 जुलाई 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों एवं साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस विशेष कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी स्वरचित पुस्तकें मुख्यमंत्री को भेंट कीं, जबकि मुख्यमंत्री ने सभी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके साहित्यिक योगदान, लेखन और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी है। उन्होंने उत्तराखंड के समग्र विकास में साहित्यकारों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई कि साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
साहित्यकार समाज के मार्गदर्शक, नई पीढ़ी को पढ़ने-लिखने की संस्कृति से जोड़ना जरूरी : सीएम धामी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड ऋषियों, मनीषियों और महान साहित्यकारों की पावन भूमि रही है। यहां की सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपरा ने भारतीय समाज को नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं के बीच पठन-पाठन और लेखन की संस्कृति को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इसके लिए समाज, साहित्यकारों और सरकार को मिलकर काम करना होगा ताकि नई पीढ़ी ज्ञान, संस्कार और रचनात्मक सोच से जुड़ सके।
उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से होगा दुर्लभ साहित्य का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के पुराने, दुर्लभ, बिखरे और अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रदेश में स्थापित होंगे दो ‘साहित्य ग्राम’
सीएम धामी ने बताया कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की योजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन साहित्य ग्रामों के माध्यम से देशभर के साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और युवा लेखकों को एक मंच मिलेगा, जिससे उत्तराखंड की साहित्यिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
साहित्यकारों के सम्मान के लिए सरकार की विशेष पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार साहित्यकारों के सम्मान और प्रोत्साहन के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि—
- वर्ष 2022 में उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान की शुरुआत की गई।
- वर्ष 2025 में दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान प्रारंभ किया गया।
इन सम्मानों का उद्देश्य प्रदेश के साहित्यकारों के योगदान को सम्मानित करना और नई पीढ़ी को साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
‘1000 पुस्तक दान अभियान’ को मुख्यमंत्री का सहयोग
हरेला पर्व के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘1000 पुस्तक दान अभियान’ को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष सहयोग देने की घोषणा की।
उन्होंने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य” जैसी पहल समाज में ज्ञान, सकारात्मक सोच और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने इसे युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और पुस्तक दान की संस्कृति को मजबूत करने वाला सराहनीय अभियान बताया।
अनेक साहित्यकार और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल सहित प्रदेश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, लेखक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
ज्ञान, संस्कृति और साहित्य को नई दिशा देने की पहल
मुख्य सेवक सदन में आयोजित यह संवाद केवल साहित्यकारों से मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तराखंड की साहित्यिक धरोहर के संरक्षण, नई पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने और राज्य को साहित्यिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार की दीर्घकालिक सोच का भी परिचायक बना।
