रुद्रपुर | रुद्रपुर में बीती दो रातों तक सड़क पर सिर्फ वाहन नहीं दौड़े, बल्कि प्रवर्तन का शिकंजा भी दौड़ता रहा। 20 और 21 अगस्त की रात एआरटीओ प्रवर्तन नवीन कुमार सिंह के नेतृत्व में चले ऑपरेशन ‘ नाइट स्ट्राइक’ से हड़कंप मच गया । यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के सामने कार्रवाई की ऐसी तस्वीर खड़ी कर दी, जिसने पूरे परिवहन अमले की सक्रियता को सामने ला दिया। दो दिन में रिकॉर्ड 343 चालान, 53 वाहन इम्पाउंड और शराब के नशे में वाहन दौड़ा रहे पांच चालक सीधे पुलिस के हवाले। इसके अलावा बिना डीएल, बिना फिटनेस, बिना परमिट, ओवरलोडिंग, गलत लेन और असुरक्षित तरीके से लोड ले जाने वाले वाहनों पर भी व्यापक कार्रवाई हुई। यह आंकड़े छोटे नहीं हैं बल्कि दो रातों की उस कार्रवाई को बता रही है कि रुद्रपुर की सड़कों पर नियम तोड़कर निकल जाने का दौर फिलहाल आसान नहीं रहने वाला।
नियमों का उल्लंघन करने वालों को 2 रातें पड़ीं भारी, सड़क पर उतरते ही चालान का शिकंजा
20 और 21 अगस्त की रात चले इस व्यापक प्रवर्तन अभियान में 343 चालान किए गए और 53 वाहन इम्पाउंड किए गए। कार्रवाई का पैमाना ही बताने के लिए काफी है कि टीमों ने महज औपचारिक चेकिंग नहीं की, बल्कि सड़क पर वाहनों को रोककर दस्तावेज, फिटनेस, परमिट, लोडिंग और यातायात नियमों की पड़ताल की। इस अभियान का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि रात के समय भी चेकिंग से बच निकलना आसान नहीं है। जिस समय आमतौर पर कई वाहन चालक यह मानकर चलते हैं कि रात में निगरानी कम होगी, उसी दौरान प्रवर्तन टीमों ने मोर्चा संभाला।

शराब पीकर निकले तो सीधे पुलिस के हवाले
अभियान में सबसे गंभीर मामलों में पांच चालक शराब के नशे में वाहन चलाते पकड़े गए। अल्कोहल मीटर से जांच कर शराब सेवन की पुष्टि की गई और तत्काल पुलिस के सुपुर्द किया गया। यह महज चालान की कार्रवाई नहीं थी। नशे में वाहन चलाने वाला चालक अपने साथ सड़क पर चल रहे हर व्यक्ति की सुरक्षा को जोखिम में डालता है। ऐसे में रात्रि चेकिंग के दौरान शराब पीकर वाहन चलाने वालों को पकड़ना अभियान का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
46 बिना डीएल, 39 बिना फिटनेस ,कागजों के भरोसे चल रही व्यवस्था पर चोट
प्रवर्तन कार्रवाई में 46 वाहन बिना ड्राइविंग लाइसेंस के मिले। वहीं 39 वाहन बिना फिटनेस संचालित होते पाए गए और 16 वाहन बिना परमिट के कार्रवाई की जद में आए। ये आंकड़े सड़क पर वाहन उतारने से पहले जरूरी वैधानिक औपचारिकताओं की अनदेखी की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। खासकर बिना फिटनेस वाहन का सड़क पर चलना वाहन की सुरक्षा और सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों के लिए भी सवाल खड़ा करता है। ऐसे में एआरटीओ नवीन कुमार सिंह की टीम ने ऐसे मामलों में सिर्फ नजर दौड़ाकर आगे बढ़ने के बजाय कार्रवाई का रास्ता चुना।

ओवरलोडिंग वालों पर भी चला डंडा, माल की हद पार करने वालों की खैर नहीं
अभियान में 39 मालवाहक वाहनों में ओवरलोडिंग पकड़ी गई, जबकि 6 यात्री वाहनों में ओवरलोडिंग के मामले सामने आए। इसके साथ 37 वाहनों में लोड बाहर निकला हुआ पाया गया। सड़क पर क्षमता से अधिक भार लेकर दौड़ते वाहन न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ाते हैं। यही वजह है कि ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई इस अभियान का प्रमुख हिस्सा रही।
गलत लेन, बिना रिफ्लेक्टिव टेप और अवैध बदलाव भी रडार पर
अभियान की निगाह सिर्फ लाइसेंस और फिटनेस तक सीमित नहीं रही। 14 वाहन गलत लेन में चलते पकड़े गए, जबकि 24 वाहनों में रिफ्लेक्टिव टेप नहीं मिला। इसके अलावा 13 वाहनों में अल्टरेशन और 2 मामलों में मालवाहक वाहनों में किराये या पारिश्रमिक पर यात्रियों को ले जाते हुए कार्रवाई की गई। यानी चेकिंग के दौरान छोटी-बड़ी हर उस लापरवाही को पकड़ा गया, जो सड़क सुरक्षा और परिवहन नियमों को प्रभावित करती है।

343 चालान , 215 मामले ‘अन्य अपराध’ में दर्ज का आंकड़ा दे रहा बड़ा संदेश
दो दिन की कार्रवाई का सबसे बड़ा असर आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। 343 चालान और 53 वाहन सीज
के साथ ही 215 मामले ‘अन्य अपराध’ में दर्ज किए गए । यह महज संख्या नहीं हैं, बल्कि दो रातों में चलाए गए प्रवर्तन अभियान की तीव्रता का संकेत हैं। उपलब्ध विवरण में अलग-अलग उल्लंघनों के आंकड़े दिए गए हैं और इनमें एक ही वाहन पर एक से अधिक उल्लंघन दर्ज होने की संभावना हो सकती है। इसलिए सभी श्रेणियों को जोड़कर अलग-अलग वाहनों की संख्या निकालना सही नहीं होगा। लेकिन इतना साफ है कि प्रवर्तन की कार्रवाई व्यापक थी और नियमों की कई परतों को एक साथ जांच के दायरे में लिया गया।

एआरटीओ नवीन का स्पष्ट संदेश , नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं
बिना डीएल हो, बिना फिटनेस हो, परमिट का मामला हो, ओवरलोडिंग हो या फिर शराब पीकर स्टेयरिंग संभालने की हिमाकत किसी भी वाहन चालक ने की तो उस पर कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी ।
हमारे अभियान का फोकस सिर्फ चालान संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि सड़क पर गंभीर जोखिम पैदा करने वाले उल्लंघनों पर कार्रवाई करना मुख्य उद्देश्य है।
