खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को लोहियाहेड पहुंचकर ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को केवल मंचों तक सीमित न रखते हुए उसे जमीन पर उतारने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री आम लोगों के बीच पैदल पहुंचे और स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध रवि के स्टॉल पर रुककर टिकी का स्वाद लिया। मुख्यमंत्री की इस सहज और आत्मीय पहल ने स्थानीय दुकानदारों, व्यापारियों और ग्रामीणों में खासा उत्साह पैदा किया।
पैदल चलकर आम लोगों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री
लोहियाहेड में मुख्यमंत्री धामी का अंदाज उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब वह बिना किसी औपचारिक तामझाम के पैदल चलते हुए आम लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों और दुकानदारों से सीधे संवाद किया और क्षेत्र की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री को अपने बीच इस सहज अंदाज में देखकर स्थानीय लोगों में उत्साह नजर आया।

रवि के स्टॉल पर रुके, चखी टिकी
मुख्यमंत्री ने लोहियाहेड स्थित रवि के प्रसिद्ध स्टॉल पर रुककर टिकी खाई। स्थानीय स्वाद का आनंद लेने के साथ ही उन्होंने स्टॉल संचालक और वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी की। मुख्यमंत्री का स्थानीय छोटे व्यवसायी के स्टॉल पर पहुंचना क्षेत्र के कारोबारियों के लिए प्रोत्साहन का संदेश माना गया।
‘लोकल फॉर वोकल’ से मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों और छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ महज एक नारा नहीं, बल्कि राज्य और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार है। स्थानीय दुकानों और उत्पादों को प्राथमिकता देने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

सादगी ने जीता लोगों का दिल
मुख्यमंत्री का पैदल चलकर आम जनता के बीच पहुंचना और स्थानीय स्टॉल पर बैठकर टिकी का स्वाद लेना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। ग्रामीणों और व्यापारियों ने मुख्यमंत्री के इस सहज व्यवहार की सराहना की। उनके इस कदम ने छोटे कारोबारियों के प्रति सम्मान और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने का एक प्रेरक संदेश भी दिया।
मुख्यमंत्री धामी की यह पहल इस बात का संदेश देती नजर आई कि स्थानीय बाजार, स्थानीय स्वाद और छोटे उद्यम ही किसी क्षेत्र की आर्थिक मजबूती की बुनियाद बन सकते हैं। जब नेतृत्व स्वयं स्थानीय कारोबारियों के बीच पहुंचकर उनका उत्साह बढ़ाता है, तो ‘लोकल फॉर वोकल’ जैसी मुहिम को जनभागीदारी का वास्तविक आधार मिलता है।
