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साफ नजर, सुरक्षित सफर: रुद्रपुर एआरटीओ कार्यालय में 75 चालकों की आंखों की जांच, 21 को मिले नि:शुल्क चश्मे

📑 विषय-सूची (Table of Contents)

    रुद्रपुर। सड़क पर वाहन चलाते समय चालक की एक छोटी-सी चूक भी किसी परिवार की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में चालक की आंखों की रोशनी केवल उसकी व्यक्तिगत जरूरत नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से सीधे जुड़ा अहम विषय है। इसी जागरूकता को मजबूती देने के उद्देश्य से बुधवार को रुद्रपुर स्थित सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय परिसर में निर्मल आई इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश के सहयोग से नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में 75 वाहन चालकों एवं नागरिकों का नेत्र परीक्षण किया गया, जबकि दृष्टि दोष पाए जाने पर 21 जरूरतमंद चालकों को नि:शुल्क चश्मे वितरित किए गए। कार्यक्रम में एआरटीओ प्रशासन मोहित कोठारी और एआरटीओ प्रवर्तन नवीन कुमार सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

    दृष्टि की जांच, सड़क सुरक्षा की पहल

    परिवहन विभाग की ओर से समय-समय पर ऐसे नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं। उद्देश्य केवल चालकों की आंखों की जांच करना नहीं, बल्कि दृष्टि संबंधी समस्या को सड़क दुर्घटनाओं के संभावित कारण के रूप में पहचानना और समय रहते उसका समाधान कराना भी है।

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    75 लोगों की आंखों का परीक्षण

    शिविर के दौरान कुल 75 वाहन चालकों एवं नागरिकों की आंखों की जांच की गई। विशेषज्ञों ने दूर और पास की दृष्टि के साथ आंखों से जुड़ी अन्य समस्याओं का परीक्षण किया और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श दिया।

    21 चालकों को मिला चश्मा

    नेत्र परीक्षण के दौरान जिन चालकों में दृष्टि दोष पाया गया, उनमें से 21 जरूरतमंद चालकों को नि:शुल्क चश्मे वितरित किए गए। चश्मा मिलने से संबंधित चालकों को बेहतर दृष्टि के साथ वाहन चलाने में मदद मिलेगी और सड़क पर उनकी सुरक्षा भी बढ़ेगी।

    कमजोर नजर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

    वाहन चलाते समय कुछ सेकंड के लिए भी दृश्य स्पष्ट न होना दुर्घटना का कारण बन सकता है। खासकर रात में वाहन चलाते समय, बारिश, कोहरे अथवा कम रोशनी की स्थिति में कमजोर दृष्टि वाले चालक के लिए जोखिम और बढ़ जाता है।

    सड़क संकेत नहीं दिखा तो खतरा बढ़ा

    स्पीड लिमिट, नो ओवरटेकिंग, मोड़, स्कूल जोन, पैदल पार पथ और अन्य यातायात संकेत चालक को समय रहते दिखाई देना जरूरी है। इसलिए आंखों की कमजोरी को व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या मानकर नजरअंदाज करना सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर लापरवाही हो सकती है।

    रात में सामने से आने वाली तेज रोशनी, कम दृश्यता और सड़क पर अचानक आने वाले अवरोधों के बीच चालक की दृष्टि की भूमिका और बढ़ जाती है। ऐसे में आंखों में परेशानी या कम दिखाई देने की शिकायत होने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

    दृष्टि दोष पाए जाने पर चश्मे का इस्तेमाल करने में किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। वाहन चालक के लिए सही नंबर का चश्मा सुरक्षा उपकरण की तरह है। स्पष्ट दृष्टि चालक को सड़क की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने और समय पर प्रतिक्रिया देने में मदद करती है।

    आंखों में लगातार थकान, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द, रात में देखने में परेशानी या सड़क संकेत स्पष्ट न दिखना जैसे लक्षण सामने आएं तो नेत्र परीक्षण कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    चालकों को केवल समस्या होने पर ही नहीं, बल्कि समय-समय पर अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए। खासकर नियमित और लंबी दूरी तक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए आंखों की जांच सड़क सुरक्षा की दिनचर्या का हिस्सा बननी चाहिए।

    शिविर में निर्मल आई इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश की विशेषज्ञ टीम ने सेवाएं दीं। टीम में वरिष्ठ नेत्र सहायक संतु यादव, जनसंपर्क अधिकारी वसीम खान, नेत्र सहायक आशीष गंगवार, सहायक बलराज सिंह और मनोज पाठक शामिल रहे।

    कार्यक्रम में एआरटीओ प्रशासन मोहित कोठारी और एआरटीओ प्रवर्तन नवीन कुमार सिंह ने चालकों को यातायात नियमों के साथ स्वास्थ्य और दृष्टि संबंधी सावधानी बरतने का संदेश दिया। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था में चालक की शारीरिक और मानसिक सजगता के साथ उसकी दृष्टि भी महत्वपूर्ण है।

    वाहन चलाने की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना होगा कि सड़क पर उसकी एक गलती केवल उसके लिए नहीं, बल्कि दूसरे वाहन चालकों, यात्रियों और पैदल राहगीरों के लिए भी खतरा बन सकती है। इसलिए ड्राइविंग लाइसेंस के साथ अपनी दृष्टि की जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है।

    शिविर के सफल आयोजन में निर्मल आई इंस्टीट्यूट, ऋषिकेश की विशेषज्ञ टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। परिवहन विभाग ने संस्थान की टीम का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस प्रकार की जागरूकता एवं स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को उपयोगी बताया।

    आंखें स्वस्थ हैं तो सफर सुरक्षित है। वाहन चलाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सड़क, संकेतक और सामने की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही हो। दृष्टि में कमी महसूस हो तो उसे छिपाएं नहीं, चश्मा लगाने में संकोच न करें और नियमित नेत्र जांच कराएं।

    सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल यातायात पुलिस या परिवहन विभाग की नहीं, हर चालक की है। आंखों की नियमित जांच कराएं, दृष्टि दोष होने पर चश्मे का इस्तेमाल करें और तब तक वाहन न चलाएं जब तक आप सुरक्षित रूप से सड़क को स्पष्ट न देख सकें। एक साफ नजर कई जिंदगियां बचा सकती है।

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