रुद्रपुर। जनपद ऊधम सिंह नगर में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्त्रियों के राजनीतिक व चुनावी गतिविधियों में भाग लेने पर स्वास्थ्य विभाग ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। कतिपय आशा कार्यकर्त्रियों के चुनाव प्रचार और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिखने की शिकायतों का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एस. के. गोस्वामी ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। सीएमओ ने साफ चेतावनी दी है कि आचार संहिता और सेवा नियमों का उल्लंघन करने वाली आशाओं के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
उच्चाधिकारियों ने जताई नाराजगी
सीएमओ डॉ. एस. के. गोस्वामी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के कुछ क्षेत्रों से आशा कार्यकर्त्रियों के विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों और चुनावी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी मिली थी। शासन व उच्चाधिकारियों द्वारा इस पर गहरा रोष व्यक्त किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आशा (ASHA) पूरी तरह से एक सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता है। उनका मूल दायित्व समाज के हर वर्ग, धर्म और समुदाय के लोगों तक बिना किसी भेदभाव के स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। ऐसे में उनका किसी राजनीतिक दल के पक्ष में सक्रिय होना स्वास्थ्य सेवाओं की निष्पक्षता और उनकी भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
सभी चिकित्सा प्रभारियों को सख्त आदेश जारी
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिले की सभी चिकित्सा इकाइयों के प्रभारियों व चिकित्सा अधिकारियों को लिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- चुनावी दूरी अनिवार्य: सभी प्रभारी अपनी-अपनी इकाइयों के अंतर्गत कार्यरत समस्त आशा कार्यकर्त्रियों और आशा फैसिलिटेटरों को निर्देशित करें कि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी राजनीतिक व चुनावी गतिविधि से पूरी तरह दूर रहें।
- सोशल मीडिया व व्हाट्सएप पर नजर: व्हाट्सएप, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया मंचों पर यदि किसी आशा कार्यकर्त्री की फोटो या वीडियो किसी राजनीतिक दल के प्रचार-प्रसार में संलिप्त पाई जाती है, तो तत्काल उसका संज्ञान लिया जाए।
- मांगा जाए स्पष्टीकरण: राजनीतिक गतिविधियों में चिन्हित आशा कार्यकर्त्रियों से तत्काल लिखित स्पष्टीकरण तलब किया जाए।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि चेतावनी के बाद भी कोई आशा कार्यकर्त्री चुनावी समर में किसी दल या प्रत्याशी का प्रचार करते हुए पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक व विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सीएमओ के इस सख्त कदम के बाद जिले भर के स्वास्थ्य महकमे और आशा कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया है।
