चम्पावत। धार्मिक आस्था, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और जनभागीदारी का दुर्लभ संगम रविवार को चम्पावत के प्रसिद्ध मानेश्वर धाम में देखने को मिला। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान के तहत जिलाधिकारी मनीष कुमार के नेतृत्व में मानेश्वर मंदिर परिसर में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान मंदिर परिसर और आसपास फैले करीब एक से डेढ़ टन प्लास्टिक एवं अन्य ठोस अपशिष्ट को एकत्र कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित किया गया। प्रशासन का स्पष्ट संदेश था कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता तभी सार्थक है, जब वहां स्वच्छता भी आस्था का हिस्सा बने।
सुबह से शुरू हुए इस विशेष अभियान में जिला प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, वन विभाग, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARRA), विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों सहित करीब 100 लोगों ने श्रमदान किया। अभियान को मानेश्वर मंदिर के पूज्य महंत स्वामी धर्मराजानन्द पुरी महाराज का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इस मुहिम से जुड़े।

अभियान का नेतृत्व कर रहे जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि चम्पावत के धार्मिक और पर्यटन स्थलों को स्वच्छ, सुंदर और पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त बनाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कार है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाए तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन आने वाले समय में जिले के अन्य प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर भी इसी तरह के अभियान चलाएगा, ताकि स्वच्छता को स्थायी जनआंदोलन बनाया जा सके।
अभियान के दौरान मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। अधिकारियों और स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं से पॉलीथिन, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा खुले में न फेंकने तथा ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण को अपनाने की अपील की। लोगों को यह भी समझाया गया कि धार्मिक स्थलों की स्वच्छता सीधे पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी हुई है।

महंत स्वामी धर्मराजानन्द पुरी महाराज ने कहा कि मानेश्वर धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी प्रतीक है। इसकी स्वच्छता और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक श्रद्धालु का धर्म और प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मंदिर परिसर में प्लास्टिक का उपयोग न करें और स्वच्छता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
अभियान में अपर जिलाधिकारी के.एन. गोस्वामी, उपजिलाधिकारी बी.सी. पंत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, अधिशासी अधिकारी भरत त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विमल कुमार सूठा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, समाजसेवी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

“मानेश्वर धाम में रविवार को चला यह अभियान केवल सफाई का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि धार्मिक आस्था, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी के संगम का ऐसा उदाहरण बना, जिसने यह संदेश दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक आंदोलन बनाए बिना प्राकृतिक और धार्मिक धरोहरों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।”
