चम्पावत। जिले में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को नई दिशा देने की पहल करते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने शुक्रवार को विकास भवन परिसर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित फूड कैंटीन का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “आदर्श चम्पावत” परिकल्पना के तहत शुरू हुई यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जिलाधिकारी ने फीता काटकर कैंटीन का उद्घाटन किया और संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही रितु कुलेठा का उत्साहवर्धन किया।
कैंटीन की स्थापना के लिए उन्हें अनटायड फंड से 65 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन का मानना है कि इस मॉडल से अन्य स्वयं सहायता समूहों को भी उद्यमिता के लिए प्रेरणा मिलेगी।

शुभारंभ के अवसर पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि स्वयं सहायता समूह केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को सहायता का पात्र बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने महिलाओं से नवाचार अपनाने और स्वरोजगार के माध्यम से दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करने का आह्वान किया।
अपर परियोजना निदेशक विम्मी जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विपणन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक स्वयं सहायता समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर स्थायी आजीविका का माध्यम बने।कार्यक्रम के दौरान केलपाल बाबा स्वयं सहायता समूह की सफलता भी सामने आई। समूह की सदस्य पार्वती द्वारा संचालित ‘पार्वती टिफिन सर्विस’ अब टिफिन सेवा के साथ विभिन्न आयोजनों के लिए कैटरिंग और पार्टी ऑर्डर भी संभाल रही है।
समूह को आजीविका विस्तार के लिए 25 हजार रुपये रिवॉल्विंग फंड तथा 75 हजार रुपये सीआईएफ फंड उपलब्ध कराया गया है, जिससे समूह की आय में लगातार वृद्धि हुई है और अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में जिला प्रशासन की यह पहल ‘आदर्श चम्पावत’ अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
